Download Pdf|हंसते हुए मेरा अकेलापन 12th Hindi Chapter 11|लेखक के बारे में|पाठ का सारांश|VVI Subjectives Questions|VVI Objectives Questions

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  हंसते हुए मेरा अकेलापन

लेखक के बारे में

हिंदी में नई कविता आंदोलन के आखिरी वर्षों में मलयज का उदय एक कवि के रूप में हुआ था। अपनी चिंतन प्रक्रिया में वे सामाजिक यथार्थ और कलात्मक अभिव्यक्ति के संश्लिष्ट संबंधों से लगातार रचनात्मक मुठभेड़ करते हुए विकसित हो रहे थे। बीसवीं शती के सातवें आठवें दशक में उनकी आलोचना का स्वस्थ रूप निखर कर सामने आया। वे रचना और आलोचना को मुक्तिबोध की तरह ही सृजन प्रक्रिया के विभिन्न पड़ावों के रूप में देख रहे थे। इस क्रम में डायरी में दर्ज दस्तावेजी सूचनाओं, व्यक्तिगत या सामाजिक अनुभवों को रचना के कच्चे के रूप में व्याख्यायित करते हैं। मलयज डायरी लेखन को अपने कर्म की साक्षी और संघर्ष प्रवक्ता मानते हैं। अपने दैनंदिन जीवन में वे जो कुछ देखते हैं और महसूस करते हैं, उसे बेहद संवेदनशीलता के साथ डायरी में दर्ज करते हैं। उनकी डायरी भावुकता के वैयक्तिकपन से विकसित होकर संवेदना की सार्वजनिकता तक अपनी अंतर्वस्तु और भाषा के माध्यम से पहुँचती है।

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पाठ का सारांश

प्रस्तुत पाठ में लेखक रानीखेत में मिलिट्री छावनी में ईंधन के लिए काटे जा रहे पेड़ों को देखकर संवेदित होते हैं। कौसानी में वे सरल स्वभाव के पहाड़ी शिक्षकों की सरलता पर मुग्ध होते हैं। दिल्ली में सात-आठ साल की बच्ची को सेब बेचते देखकर अंदर तक द्रवित हो उठते हैं। अपने अनायास से भय को भी साफ साफ लिख देते हैं। जीवन के सुखात्मक और दुखात्मक अनुभवों के प्रति एक गहरी रागात्मक संपृक्ति उनकी डायरी के इन अंशों को पढ़कर यह अनुभव होता है कि मलयज के लिए साहित्य सृजन महज शब्दों का व्यापार नहीं है । साहित्य लिखने और साहित्यकार बनने के लिए लेखन से परे जीवन में भी एक सजगता, स्वाधीनता और सावधानी का होना जरूरी है। लेखक के निजी जीवन की तकलीफ, बेचैनियाँ तथा बाहरी संसार के विभिन्न मनोरम प्राकृतिक दृश्य, आर्थिक सामाजिक असमानता, स्वाध्याय, विभिन्न प्रकार के समाजो और व्यक्तियों का संसर्ग आदि बहुत कुछ मिलकर उनकी रचनात्मकता को निर्धारित करते हैं। मलयज का मानना है कि हम जिस संसार में रहते हैं, उसमें हम संबंधों की सापेक्षता के बीच अपने कार्यकलाप करते हैं। हमारे जीवनानुभव और उसके प्रति हमारा व्यवहार एक नया यथार्थ बनाता है जो दूसरों को भी प्रभावित करता है। इस तरह दूसरों के अनुभव और उनके व्यवहार हमें भी प्रभावित करते हैं। अतः आदमी दूसरों के कार्यकलापों से प्रभावित होता है तो यह यथार्थ को भोगना या जीना कहा जाता है तथा उसके अपने कार्यकलाप एक नये रचे यथार्थ की तरह होते हैं जो दूसरों को प्रभावित करते हैं। उन्होंने इस संसार को यथार्थ की लेन-देन का नाम दिया है। हर आदमी इस यथार्थ की लेन-देन अर्थात् प्रभावित करने तथा प्रभावित होने की प्रक्रिया में शामिल होता है। संबंधों की यह सक्रियता ही उसे मनुष्य बनाये रखती है। चूंकि यह परस्पर प्रभाव का भाव है, अतः यह भी एक रचनात्मक कर्म है क्योंकि रचनात्मकता एकांतिक या निरपेक्ष नहीं होती।

 

 

Q.1. डायरी क्या है?

उत्तर:- डायरी एक स्वतंत्र साहित्य विधा है। इसमें लेखक किसी सर्जनात्मक साहित्य की बजाय अपने विचारों, अनुभवों और प्रतिक्रियाओं को तारीखवार प्रकट करता है भाषा की सर्जनात्मकता इसे  तथ्यात्मक से ऊपर उठाकर एक स्वतंत्र रचनात्मक मूल्य प्रदान करती है।  किसी कवि, लेखक की आलोचना की डायरी उसके उस विधा में रचनात्मक तैयारी के विभिन्न उच्चवचों की दस्तावेज होती है।

 

Q.2. डायरी का लिखा जाना तो मुश्किल है?

उत्तर:- लिखने मात्र के लिए एक तटस्थता जरूरी होती है। चूंकि डायरी में शब्दों और अर्थों के बीच तटस्थता कम रहती है, अतः डायरी का लिखा जाना मुश्किल है।

 

Q.3. किस तारीख की डायरी आपको  सबसे प्रभावी लगी और क्यों?

उत्तर:- दिल्ली, 30 अगस्त 76 की डायरी मुझे सबसे अधिक प्रभावी लगी। लेखक ने एक कम उम्र की लड़की द्वारा सेब बेचे जाने की घटना का बड़ा मार्मिक चित्रण किया है। लेखक बताता है कि वह लड़की इसकी कमजोर थी की सेब को चाकू से कई प्रयास के बाद भी काट नहीं पाती थी। लेखक उसके कम उम्र और इस जिम्मेदारी बड़े काम के बीच उसके पीसते हुए मासूम बचपन को लक्षित करता है।  लेखक लिखता है:  ‘पर वह साथ  साल-आठ की लड़की जिसने शायद नई-नई दुकान संभाली थी या कि जिसे हाल में ही दुकान संभालने दी गई थी, अपने ग्राहक को अपने सौदे के बारे में शक की जरा गुंजाइश ना देने को आतुर थी।’

 

Q.4. डायरी के इन अंशों में मलयज की गहरी संवेदना घुली हुई है। इसे प्रमाणित करें।

उत्तर:- मलयज डायरी लेखन को अपने कर्म का साक्षी और संघर्ष का प्रवक्ता मानते हैं। अपने दैनिक जीवन में वे जो कुछ देखते हैं और महसूस करते हैं उसे बेहद संवेदनशीलता के साथ डायरी में दर्ज करते हैं। भावुकता कि वैयक्तिकता से निकलकर संवेदना की सर्विकता तक उनकी अपनी अंतर्वस्तु और भाषा के माध्यम से पहुंचती है। वे रानीखेत में मिलिट्री छावनी के लिए इंधन के लिए काटे जा रहे  पैरों को देख कर संवेदीत होते हैं कौसानी से सरल स्वभाव के पहाड़ी शिक्षकों की सरलता पर मुग्ध होते हैं दिल्ली में सात आठ साल की बच्ची को सेवर बेचते देख देख कर अंदर तक द्रवित हो उठते हैं अपनी अनायास से भय को भी साफ साफ लिख देते हैं इस तरह जीवन के सुख आत्मक तथा दुख आत्मक अनुभवों के प्रति एक गहराई हरात्मक संपर्क व्यक्ति उनकी जोड़ी को भी संवेदना ओके संसार के रूप में विकसित कर देती है।

 

Q.5. ‘धरती का छन’ से क्या आशय है?

उत्तर:- यह रचना-प्रक्रिया से संबंधित पद है। मलयज बताते हैं कि रचनाकार के अंतस में किसी अनुभूति की सटीक अभिव्यक्ति के लिए आलोरन-विलोरन की प्रक्रिया चलती रहती है। डायरी में जब कविता की तरह सृजनात्मकता का फूट डालना चाहता है तो कई बार शब्दों और अर्थों के बीच अंतराल आ जाता है।  अर्थात  शब्द अर्थ को पूरी रचनात्मकता के साथ ठीक से प्रकट नहीं कर पाते।  जिस क्षण वह इस कलात्मक स्थिति को प्राप्त कर लेता है कि अर्थ को प्रकट करने के लिए सटीक शब्द मिल जाए तथा  वह सर्जनात्मक भी हो, उसी क्षण को वह ‘धरती का क्षण’ मानते हैं।

 

Q.6. रचे हुए यथार्थ और भोगे हुए यथार्थ में क्या संबंध है?

उत्तर:- रचा हुआ यथार्थ भोगे हुए यथार्थ से अलग है।भोगा हुआ यथार्थ एक दिया हुआ यथार्थ है।  हर आदमी अपना-अपना यथार्थ रचता है और उस रचे हुए यथार्थ का एक हिस्सा दूसरों को दे देता है।  हर एक का भोगा हुआ यथार्थ दूसरों के दिए हुए हिस्से-हिस्से यथार्थ का सामूहिक नाम है। इसलिए यथार्थ की रचना एक नैतिक कर्म है, क्योंकि वह एक सामाजिक  सत्य की भी सृष्टि करता है।

 

Q.7. लेखक के अनुसार सुरक्षा कहाँ है? वह डायरी को किस रूप में देखना चाहता है?

उत्तर:- सुरक्षा जीवन के संघर्षों से पलायन में नहीं बल्कि उनका सामना करने में है। डायरी के संबंध में लेखक कहता है कि वहाँ भी सुरक्षा नहीं है,  बल्कि एक तरह का पलायन ही है सुरक्षा सूरज की रोशनी में है। अंधेरे में नहीं। अंधेरे में सिर्फ छिपा जा सकता है, एक-एक पल की धुकधुकी के साथ। सुरक्षा चुनौती को झेलने में ही है, लड़ने में पीसने में और ख़टने में ही है। बचाने में नहीं, अपने को सेने ने नहीं। लेखक जीवनानुभव और काव्यानुभव के अंतस संघर्षों से होकर गुजरने में ही रचनात्मक सुरक्षा की बात करता है।

Q.8. डायरी के इन अंशों से लेखक के जिस ‘मूड’ का अनुभव आपको होता है, उसका परिचय अपने शब्दों में दीजिए।

उत्तर:- डायरी के अंशों को पढ़कर यह अनुभव होता है की मलयज के लिए साहित्य सृजन महज शब्दों का व्यापार नहीं है। साहित्य लिखने और साहित्यकार बनने के लिए लेखन से परे जीवन में भी एक सजगता, स्वाधीनता और सावधानी का होना जरूरी है।  लेखक के निजी जीवन की तकलीफ, बेचैनियां तथा बाहरी संसार के विभिन्न मनोरम प्राकृतिक दृश्य, आर्थिक सामाजिक असमानता, स्वाध्याय, विभिन्न प्रकार के समाजों और व्यक्तियों का संसर्ग के आदि बहुत कुछ मिलकर उनकी रचनात्मक को निर्धारित करते हैं। वह एक संवेदनशील ‘मूड’ के व्यक्ति हैं जो एक साथ बाहरी जगत और अंतर्मन की यात्रा करते हैं।

 

Q.9. चित्रकार की किताब में लेखक ने कौन सा रंग सिद्धांत पढ़ा था?

उत्तर:- चित्रकारी की किताब किताब में लेखक ने पढ़ा था कि शौक और भड़कीले रंग संवेदना को बड़ी तेजी से उभरते हैं,  उन्हें बड़ी तेजी से चरम बिंदु की ओर ले जाते हैं और उतनी ही तेजी से उन्हें ढाल की ओर खींचते हैं।

 

Q.10. 11 जून 78 की डायरी से शब्द और अर्थ के संबंध पर क्या प्रकाश पड़ता है अपने शब्दों में लिखें।

उत्तर:- डायरी यदि कविता के मूड में लिखी जाए तो शब्दों और अर्थों के बीच एक द्वंदात्मक प्रक्रिया उत्पन्न हो जाती है। चूंकि कविता की भाषा रचनात्मक होती है,  वह तथ्यात्मक नहीं होती। लेकिन उसके साथ यह दायित्व भी होता है कि वह अपनी भाषा गत रचनात्मक में भी यथार्थ का साथ ना छोड़े। यह यथार्थ काफी कुछ तथ्यात्मक होता है। अतः कविता की रचना प्रक्रिया में वस्तुओं का यथार्थ और कलात्मक यथार्थ के बीच द्वंद इन्हीं शब्दों और परसों के द्वंद के रूप में प्रकट होता है। जब शब्दों और अर्थों के बीच वस्तु का और का लागत संगति नहीं बैठती तो उसे मलयज ने आकाश की अवस्था कहा है, जहां कला एक मानसिक सत्ता या अमूर्तन की अवस्था में होती है।  जब यह संगति बैठ जाती है तो यह धरती का छन हो जाता है जहां कला मूर्त होती है।

 

Q.11. रचना और दस्तावेज में क्या फर्क है? लेखक दस्तावेज को रचना के लिए कैसे जरूरी बताता है?

उत्तर:- दस्तावेज रचना का कच्चा माल है।  लेखक मान्यता है कि दस्तावेज मेरे जीवन का भोग अनुभव है जो रचना रूपी करेंसी को वास्तविक मूल प्रदान करने वाला मूलधन है। वह मिट्टी है जिसके बिना न बीज की सत्ता है न बीज अपने को चरितार्थ करता है। रचना में छिपी हुई भविष्य दृष्टि का मूल स्रोत दस्तावेज में छिपा हुआ अतीत का अनुभव ही है।

 

Q.12. लेखक अपने किस डर की बात करता है? इस डर की खासियत क्या है? अपने शब्दों में लिखिए।

उत्तर:- लेखक यह अनुभव करता है कि पिछले कई सालों से उसे एक लड़की अनुभूति लगातार होती है। वह घर में किसी के बीमार होने से डरता है कि गंभीर रूप से बीमार हो जाने पर वह उसके लिए अस्पताल और इलाज का प्रबंध कैसे करेगा। किसी के बाहर चले जाने पर उसके सकुशल लौट पाने या ना पाने की आशंका से उसका मन डर जाता है। वह महसूस करता है कि उसका मन इतना कमजोर हो चुका है कि वह छोटी-सी-छोटी घटना को एक बड़े संकट की आहट मान कर डर जाता है। दरअसल उसका यह डर हर मध्यमवर्गीय व्यक्ति का डर है जो जीवन की अनिश्चित ताऊ से एक अबूझ से डर में घिरा रहता है।

 

Q.13. डायरी क्या है? डायरी क्यों लिखनी चाहिए?

उत्तर:- डायरी एक स्वतंत्र साहित्यिक विधा है।  इसमें लेखक किसी लेखक किसी सर्जनात्मक साहित्य की बजाय अपने विचारों अनुभव और  प्रतिक्रियाओं को तारीखवार प्रकट करता है। भाषा की सर्जनात्मकता इसे तथ्यात्मकता से ऊपर उठाकर एक स्वतंत्र रचनात्मक मूल्य प्रदान करती है। मलयज का मानना है कि डायरी जो की प्रायः रोजनामचा की विवरणिका ही हुआ करती है, दरअसल एक रचनात्मक इकाई का रूप ले लेती है। डायरी में दर्ज दस्तावेजी सूचनाओं, व्यक्तिगत या सामाजिक अनुभवों को रचना के कच्चे माल के रूप में देखा जा सकता है। मलयज अनुसार डायरी लेखक कर्म की साक्षी और संघर्ष की प्रवक्ता होती है। अतः अपनी तत्कालीन तत्कालीन तत्कालीन व्यक्ति भावनाओं की त्वरित अभिव्यक्ति के लिए डायरी लिखनी चाहिए यही डायरी रचनाकार के अस्थाई महत्व की संवेदना पूर्ण रचनात्मकता के लिए आधार-सामग्री का भी कार्य करती है।

 

1. मलयज का जन्म कब हुआ?

(क)1935

(ख) 1936

(ग) 1937

(घ) 1938

उतर – 1935

 

2. मलयज का निधन कब हुआ?

(क) 26 अप्रैल

(ख) 26 मई

(ग) 26 मई

(घ) 26 जुलाई

उतर – 26 अप्रैल

 

3. मलयज का जन्म कहाँ हुआ था?

(क) लखनऊ, उत्तरप्रदेश

(ख) गोरखपुर, उत्तरप्रदेश

(ग) झांसी, उत्तरप्रदेश

(घ) आजमगढ़, उत्तरप्रदेश

उतर – आजमगढ़, उत्तरप्रदेश

 

4. मलयज का मूलनाम क्या था?

(क) चंदन श्रीवास्तव

(ख) रमणजी श्रीवास्तव

(ग) भरतजी श्रीवास्तव

(घ) गुंजन श्रीवास्तव

उतर – भरतजी श्रीवास्तव

 

5. मलयज ने किस विशेषांक का संपादन किया था?

(क) लहर का कविता विशेषांक

(ख) धर्मयुग का कहानी विशेषांक

(ग) साप्ताहिक हिंदुस्तान का कविता विशेषांक 

(घ) कादम्बिनी का कविता विशेषांक

उतर – लहर का कविता विशेषांक

 

6. ‘हँसते हुए मेरा अकेलापन’ किसकी कृति है?

(क) मुक्तिबोध 

(ख) नामवर सिंह 

(ग) अज्ञेय

(घ) मलयज

उतर – मलयज

 

7. ‘हँसते हुए मेरा अकेलापन’ साहित्य की किस विद्या से संबंधित है ?

(क) सर्जनात्मक गद्य 

(ख) समीक्षात्मक 

(ग) कथात्मक गद्य 

(घ) छायावादी गद्द्

उतर – सर्जनात्मक गद्य 

 

 

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