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Biology 12th VVI Questions part – 02 (जैव विविधता एवं संरक्षण)

Biology 12th VVI Questions part – 02 (जैव विविधता एवं संरक्षण)


Q.1. “बाघ परियोजना का वर्णन कीजिए।

उत्तर – बाघ परियोजना (Project Tiger) – इस परियोजना का आरम्भ सन् 1973 में किया गया। इसका मुख्य उद्देश्य विभिन्न राष्ट्रीय उद्यानों में बाघों का संरक्षण करना है। इससे सम्बन्धित महत्त्वपूर्ण राष्ट्रीय उद्यान, कॉर्बेट नेशनल पार्क, नैनीताल (उत्तराखण्ड), रणथम्भौर राष्ट्रीय उद्यान, सवाई माधोपुर (राजस्थान) एवं सुन्दरवन चीता अभयारण्य (पं बंगाल) हैं।

Q.2. वन्यजीव की परिभाषा लिखिए। इसके संरक्षण की दो प्रमुख विधियों का वर्णन कीजिए।

उत्तर – वन्यजीव में वे सभी प्राणी तथा पादप आते हैं जो मनुष्य के नियन्त्रण और प्रभुत्व से दूर अपने प्राकृतिक वास स्थानों में रहते हैं। वन्य जीव संरक्षण विस्तृत रूप से दो प्रमुख विधियों द्वारा किया जाता है –
1. स्वस्थाने संरक्षण (In- situ Conservation) – स्वस्थाने संरक्षण वन्य जन्तुओं के प्राकृतिक आवास में किया जाता है। इसके लिए इन प्राकृतिक आवास स्थानों को निषिद्ध क्षेत्र घोषित कर दिया जाता है। निषेध की सीमा के अनुसार इन क्षेत्रों को निम्न प्रकारों में बाँटा गया है –

  1. राष्ट्रीय उद्यान (National Park)
  2. अभयारण (Sanctuaries)
  3. जीवमण्डल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere reserve)
  4. अलौकिक ग्रूव्स तथा झीलें (Sacred grooves and lakes)

2. बहिस्थाने संरक्षण (Ex- situ Conservation) – इस संरक्षण में संकटोत्पन्न पादपों तथा जन्तुओं का उनके प्राकृतिक आवास से अलग एक विशेष स्थान पर अच्छी देखभाल की जाती है और सावधानीपूर्वक संरक्षित किया जाता है। इसके अन्तर्गत जन्तु उद्यान, वानस्पतिक उद्यान, वन्य जीव सफारी पार्क, बीज बैंक एवं जीन बैंक आदि आते हैं।

Q.3. प्राणि विहार क्या है ? भारत के दो प्राणि विहारों के नाम लिखिए।

उत्तर – अभयारण (प्राणि विहार, Sanctuaries) – अभयारण्यों का उद्देश्य केवल वन्य जीवन का संरक्षण करना होता है। अतः इसमें व्यक्तिगत स्वामित्व, लकड़ी काटने, पशुओं को चराने आदि की अनुमति इस प्रतिबन्ध के साथ दी जाती है कि इन क्रिया-कलापों से वन्य प्राणी प्रभावित न हों। इनकी स्थापना एवं नियन्त्रण सम्बन्धित राज्य सरकार के अधीन होती है। भारत में लगभग 520 अभयारण हैं। भारत के दो प्राणि विहार-

  1. जलदापारा जन्तु विहार, मदारीहाट-पश्चिमी बंगाल
  2. घाना पक्षी विहार, भरतपुर-राजस्थान।

Q.4. जीवमण्डल आरक्षित क्षेत्र से आप क्या समझते हैं ? भारत में कितने जीव-मण्डल आरक्षित क्षेत्र हैं ?

उत्तर – जीवमण्डल आरक्षित क्षेत्र (Biosphere Reserve) – सन् 1971 में यूनेस्को की मनुष्य एवं जीव-मण्डल परियोजना के अन्तर्गत मानव कल्याण हेतु जीवमण्डल के संरक्षण की दृष्टि से जीवमण्डल आरक्षित क्षेत्रों की स्थापना का शुभारम्भ किया गया। भारत में कुल 18 जीवमण्डल आरक्षित क्षेत्र हैं जिनमें से हिमालय प्रदेश का शीत मरुस्थल क्षेत्र तथा शेशाचालम प्रमुख हैं।

Q.5. पादपों की जाति विविधता (22 प्रतिशत), जन्तुओं (72 प्रतिशत) की अपेक्षा बहुत कम है। क्या कारण है कि जन्तुओं में अधिक विविधता मिलती है ?

उत्तर – प्राणियों में अनुकूलन की क्षमता पौधों की अपेक्षा बहुत अधिक होती है। प्राणियों में प्रचलन का गुण पाया जाता है, इसके फलस्वरूप विपरीत परिस्थितियाँ होने पर ये स्थान परिवर्तन करके स्वयं को बचाए रखते हैं। इसके विपरीत पौधे स्थिर होते हैं, उन्हें विपरीत स्थितियों का अधिक सामना करना ही पड़ता है। प्राणियों में तन्त्रिका तन्त्र तथा अन्त:स्रावी तन्त्र पाया जाता है। इसके फलस्वरूप प्राणी वातावरण से संवेदनाओं को ग्रहण करके उसके प्रति अनुक्रिया करते हैं। प्राणी तन्त्रिका तन्त्र एवं अन्त:स्रावी तन्त्र के फलस्वरूप स्वयं को वातावरण के प्रति अनुकूलित कर लेते हैं। इन कारणों के फलस्वरूप किसी भी पारितन्त्र में प्राणियों में पौधों की तुलना में अधिक जैव विविधता पाई जाती है।

Q.6. पवित्र उपवन क्या हैं ? उनकी संरक्षण में क्या भूमिका है ?

उत्तर – अलौकिक ग्रूव्स या पवित्र उपवन पूजा स्थलों के चारों ओर पाये जाने वाले वनखण्ड हैं। ये जातीय समुदायों/राज्य या केन्द्र सरकार द्वारा स्थापित किये जाते हैं। पवित्र उपवनों से विभिन्न प्रकार के वन्य जन्तुओं और वनस्पतियों को संरक्षण प्राप्त होता है क्योंकि इनके आस-पास हानिकारक मानव गतिविधियाँ बहुत कम होती हैं। इस प्रकार ये वन्य जीव संरक्षण में धनात्मक योगदान प्रदान करते हैं।

Q.7. पारिस्थितिकीविद् किस प्रकार विश्व की कुल जातियों का आकलन करते हैं ?

उत्तर – पृथ्वी पर जातीय विविधता समान रूप से वितरित नहीं है, बल्कि एक रोचक प्रतिरूप दर्शाती है। पारिस्थितिकीविद् विश्व की कुल जातियों का आकलन अक्षांशों पर तापमान के आधार पर करते हैं। जैव विविधता साधारणतया, उष्ण कटिबन्ध क्षेत्र में सबसे अधिक तथा ध्रुवों की तरफ घटती जाती है। उष्ण कटिबन्ध क्षेत्र में जातीय समृद्धि के महत्त्वपूर्ण कारण इस प्रकार हैं- उष्ण कटिबन्ध क्षेत्रों (Tropical regions) में जैव जातियों को विकास के लिए अधिक समय मिला तथा इस क्षेत्र को अधिक सौर ऊर्जा प्राप्त हुई जिससे उत्पादकता अधिक होती है। जातीय समृद्धि किसी प्रदेश के क्षेत्र पर आधारित होती है। पारिस्थितिकीविद् प्रजाति की उष्ण एवं शीतोष्ण प्रदेशों (Temperate regions) में मिलने की प्रवृत्ति, अधिकता आदि की अन्य प्राणियों एवं पौधों से तुलना कर उसके अनुपात की गणना और आकलन करते हैं।

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